30 January 2020

[Society] Crime & Criminal

अपराध के सामाजिक कारण ः
किसी भी अपराध के होने में समाज का बहुत बड़ा योगदान होता है क्योंकि संभवतः ऐसा देखने को मिलता है कि आज के समय में समाज गलत चीजों व अपराध का विरोध करने में बहुत कमजोर दिख रहा है और जानबूझकर खामोश है खामोशी के कारण भी हैं जो यह है कि अगर समाज का कोई व्यक्ति समाज में हो रहे अपराध‚अपराधी और गलत कार्यों का विरोध करता है तो समाज के ही कुछ लोग जिनको समाज में हो रहे उन अपराधों से किसी भी प्रकार से फायदा पहुंचता है वो लोग विरोध कर रहे व्यक्ति व उसके परिवार पर दबाव बनाकर चुप करा देते हैं और परिवार सख्त हाेकर अपराध का विरोध करने के बजाय डर कर खामोश हो जाता है। समाज में ऐसा भी होता है कि समाज के लोग अपराधी से व्यक्तिगत सम्बन्ध खराब न हो इसके लिए भी अपराध व अपराधी का विरोध नहीं करते हैं जो कि समाजिक पर्यावरण के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

अपराधी पर विद्वानों के मत ः
अगर हम विद्वानों की बात करें तो उनके अनुसार अपराधी जन्मजात नहीं होते हैं बल्कि ज्यादातर विद्वान इस बात पर अधिक बल देते हैं कि अपराध्री समाज द्वारा बनाये जाते हैं। प्रमुख विद्वान–सदरलैण्ड‚टैफ्ट।

  

22 January 2020

Society & Criminal

गहरी खाईं की ओर बढ़ते हुए से अन्जान हमारा समाज

हमारा समाज अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इतना व्यस्त हो गया है कि उसके समाज में क्या हुआ है क्या हो रहा है किसी चीज का ज्ञान नहीं है हमारा समाज जाने अनजाने अपराधियों का संरक्षक बना हुआ है अगर कोई अपराधी अपराध करके पैसों के बल पर या किसी भी तरह से कानून से बच जाता है तो वह निडर हो जाता है और हमारा समाज उस अपराधी का विरोध करने के बजाय एक लंबे समय के बाद अपराधी के द्वारा किए गए अपराध को गलती व भूल या लिखा था सो हो गया कहकर माफ कर देता है जिससे समाज के और लोग भी निडर होकर अपराध करते हैं गलती या भूल की माफी हो सकती है लेकिन अपराध की सिर्फ व सिर्फ सजा होती है।

समाज की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि जो अपराधी कानून से बच गए हैं वह उनके साथ ऐसा व्यवहार करें जिससे अपराधियों को उनके द्वारा किए गए अपराध का पछतावा हो लेकिन हमारा समाज बिल्कुल इसके विपरीत काम करता है अपराधी के साथ ऐसा व्यवहार करता है मानो वह समाज का कोई आम सदस्य या उसने कोई अपराध किया ही नहीं हो |
इस प्रकार, हो गए अपराध के अपराधी को, गलत कार्यों में संलिप्त के लोगों को और हो रहे अपराधों पर चुप रहकर हमारा समाज अपराध को बढ़ावा व अपराधियों का संरक्षण करता है और अगर समाज का इसी तरह रवैया जारी रहा तो हमारा समाज जिस खाईं की ओर बढ़ते हुए जा रहा है उसका समाज के लोगों को अंदाजा तक नहीं है |