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22 January 2020

Society & Criminal

गहरी खाईं की ओर बढ़ते हुए से अन्जान हमारा समाज

हमारा समाज अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इतना व्यस्त हो गया है कि उसके समाज में क्या हुआ है क्या हो रहा है किसी चीज का ज्ञान नहीं है हमारा समाज जाने अनजाने अपराधियों का संरक्षक बना हुआ है अगर कोई अपराधी अपराध करके पैसों के बल पर या किसी भी तरह से कानून से बच जाता है तो वह निडर हो जाता है और हमारा समाज उस अपराधी का विरोध करने के बजाय एक लंबे समय के बाद अपराधी के द्वारा किए गए अपराध को गलती व भूल या लिखा था सो हो गया कहकर माफ कर देता है जिससे समाज के और लोग भी निडर होकर अपराध करते हैं गलती या भूल की माफी हो सकती है लेकिन अपराध की सिर्फ व सिर्फ सजा होती है।

समाज की यह जिम्मेदारी होनी चाहिए कि जो अपराधी कानून से बच गए हैं वह उनके साथ ऐसा व्यवहार करें जिससे अपराधियों को उनके द्वारा किए गए अपराध का पछतावा हो लेकिन हमारा समाज बिल्कुल इसके विपरीत काम करता है अपराधी के साथ ऐसा व्यवहार करता है मानो वह समाज का कोई आम सदस्य या उसने कोई अपराध किया ही नहीं हो |
इस प्रकार, हो गए अपराध के अपराधी को, गलत कार्यों में संलिप्त के लोगों को और हो रहे अपराधों पर चुप रहकर हमारा समाज अपराध को बढ़ावा व अपराधियों का संरक्षण करता है और अगर समाज का इसी तरह रवैया जारी रहा तो हमारा समाज जिस खाईं की ओर बढ़ते हुए जा रहा है उसका समाज के लोगों को अंदाजा तक नहीं है |