गहरी खाईं की ओर बढ़ते हुए से अन्जान हमारा समाज
हमारा समाज अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में इतना व्यस्त हो गया है कि उसके समाज में क्या हुआ है क्या हो रहा है किसी चीज का ज्ञान नहीं है हमारा समाज जाने अनजाने अपराधियों का संरक्षक बना हुआ है अगर कोई अपराधी अपराध करके पैसों के बल पर या किसी भी तरह से कानून से बच जाता है तो वह निडर हो जाता है और हमारा समाज उस अपराधी का विरोध करने के बजाय एक लंबे समय के बाद अपराधी के द्वारा किए गए अपराध को गलती व भूल या लिखा था सो हो गया कहकर माफ कर देता है जिससे समाज के और लोग भी निडर होकर अपराध करते हैं गलती या भूल की माफी हो सकती है लेकिन अपराध की सिर्फ व सिर्फ सजा होती है।
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इस प्रकार, हो गए अपराध के अपराधी को, गलत कार्यों में संलिप्त के लोगों को और हो रहे अपराधों पर चुप रहकर हमारा समाज अपराध को बढ़ावा व अपराधियों का संरक्षण करता है और अगर समाज का इसी तरह रवैया जारी रहा तो हमारा समाज जिस खाईं की ओर बढ़ते हुए जा रहा है उसका समाज के लोगों को अंदाजा तक नहीं है |
